Blog Archive


Thursday, May 31, 2012

some unique clips................

ALL IN ONE..................
 HUMM :-(

Monday, May 28, 2012

Gambhir said.:"Now I can be honest and tell you that it was a superstition,"

It is common knowledge that sportsmen tend to relate success with superstition and it has been affirmed by Gautam Gambhir who has been so superstitious through the IPL that he stuck to his routine of keeping his pads on till the very end in every game.
"Now I can be honest and tell you that it was a superstition," the Kolkata Knight Riders captain said after his side's triumph in the fifth edition of Indian Premier League here last night.
The only occasion he removed his pads after getting out, the Knight Riders lost.  "There was only once in the tournament when I
took off my pads after I got out, and that was against the Kings XI. We could not manage to get 13 from 12 balls in that
"I was not shell shocked because it wasn't about me getting out   KKR is not about me, it's about we. I was just one of the players going out there to contribute for KKR. I had faith in all the players."
Despite chasing an imposing target in the title clash at the M A Chidambaram Stadium, Gambhir said he was confident that his side would cross the line. "I would be lying if I said I was absolutely relaxed. When you're playing such a big game there is a bit of tension
involved. But somewhere down the line I knew that we could cross the line.
"The important thing was to stay in touch with required rate and take it to the 18th over with wickets in hand. In a big game, if you need 20 from the last two with six wickets in hand and have guys like Shakib and Manoj at the crease the batting side is going to come good more often than not.
"If the guys can keep the game alive till the 18th over then it would take only one or two good hits in the end, and that's what happened," Gambhir said.

Saturday, May 26, 2012


An Appeal for Strict Law Against Rape.. {Please Share this & Spread the Message }
The following Story would Shake your Soul....

... This is Asma, a 14-yr old girl from Malvani, Malad, Mumbai..
She was kidnapped from her locality by 5 men living in the same locality
in the month of May 2011.She was in captivity in the same area.
A complaint was made to police but of no use.

This 14 yr old girl was raped innumerable times by those 5 men.
After 2-3 months they lost interest in her..
Now the question was "WHo WILL SPEND MONEY FOR HER FOOD ???"
They started putting it on each other.

Result : She was given 1 vada-pav in 4-5 days.
After 5 months, she was found in garden.She was a bag of bones when she was found.
When she was operated, doctors found pieces of paper,mud, soil,stones in her stomach.
According to doctors, because of hunger she ate up the paper in which the vada-pav was
given.Her situation was so bad, she ate up stones, dress, & soil....
The doctors were unable to explain her situation.
After suffering for more than 5 months,
she finally breathed her last on 14 Nov 2011 (Children's Day).

You might have heard many stories wherein people are slaughtered & raped...
But imagine a 14 yr old girl being raped innumerable times &
she died every moment for more than 150 days...EVERY MOMENT......

We cant even imagine it.........
This is one of the most horrific incidents that has happend to any human.
You won't see this news on any television, may be because of political pressure it is being suppressed.

I would like to make two request with this:

1. The 5 men who are absconding now, should be caught & punished severely.

Please Share this & Spread the Message !!!!!
to spread this click here


इक्कीसवी शताब्दी का धर्मं - जैन धर्मं * मुजफ्फर हुसैन !! ये नहीं पढ़ा तो क्या पढ़ा ????
एक मुस्लिम चिन्तक की द्रष्टि से जैन धर्मं का महात्म्य और उसमे निहित असीम संभावनाए ]

---> 21
वी शताब्दी का धर्मं 'जैन धर्मं' होगा ! इसकी कल्पना किसी सामान्य आदमी ने नहीं की है, बल्कि 'बनार्ड शो' ने कहा कि यही मेरा दूसरा जन्म हो तो मैं जैन धर्मं में पैदा होना चाहता हूँ, ये बात स्वयं 'बनार्ड शो' ने गाँधी जी के पुत्र देवदास गाँधी से कही थी !

रेवेरेंड तो यहाँ तक कहते है कि दुनिया का पहला मजहब जैन था और अंतिम मजहब भी जैन होगा !

बाल्टीमोर [USA] के दार्शिनिक डॉक्टर मोराइस का कहना है कि यही जैन धर्म को दुनिया ने अपनाया होता तो यह दुनिया बड़ी खुबसूरत होती !

जस्टिस रानाडे ने कहा कि ऋषभदेव, नेमिनाथ, पार्श्वनाथ और महावीर, ये चार तीर्थंकर नहीं बल्कि जीवन और चिंतन कि चार दिशाए है !

ऐसा जैन धर्मं में क्या है ? जैन धर्मं सिर्फ धर्म नहीं, जीवन जीने का दर्शन है, सरल भाषा में कहू तो यह खुला विश्वविद्यालय है ! आपको जीवन का जो पहलु चाहिए वो यहाँ मिल जायेगा ! दर्शन ही नहीं बल्कि संस्कृति, कला, संगीत और भाषा का यह संगम है ! जैन तीर्थंकरो ने संस्कृत को अपनाकर जनभाषा प्राकृत को अपनाया, क्योकि वे जैनदर्शन को विद्वानों तक सीमित नहीं रखना चाहते थे ! वह तो सामान्य आदमी तक पहुचे और उसके जीवन का कल्याण करे, यह चिंतन था !

दुनिया के सभी धर्मो ने अपने चिन्ह किये, इनमे कुछ हथियार के रूप में, तो कुछ आकाश में चमकने वाले चाँद और सूरज के रूप में ! २४ तीर्थंकरो में एक भी ऐसा नहीं दिखलाई पड़ता जिसके पास धनुष-बाण हो या फिर गदा अथवा त्रिशूल हो ! हथियारों से लेस दुनिया के रजा अपनी शानो-शोकत से अपना दबदबा बनाये रखने में अपनी महानता समझते थे, लेकिन यहाँ तो भोले-भाले पशु-पक्षी अथवा जलचर प्राणी उनके साथ है, उनका कहना था हम साथ साथ जियेंगे और इस दुनिया को हथियार रहित बनायेंगे ! इन्सान ने सुविधा के लिए घोड़े, हाथी, गरुड़, मोर और जाने किन किन प्राणियों को अपनी सवारी बना ली ! लेकिन जैन तीर्थंकर तो किसी को कष्ट नहीं देना चाहता है, वे अपने पाँव के बल पर साड़ी दुनिया को उगालते है और प्रकृति के भीड़ को जानने कि कोशिश करते है ! रहने को घर नहीं, खाने कोई स्थायी व्यवस्था नहीं, लेकिन दुनिया के कष्टों का निवारण करने के लिए अपनी साधना में कमी नहीं आने देते !

दुनिया में असंख्य वाद है, जो भिन्न भिन्न विचारधारा पर अपना चिंतन करते है, ये विचार से समाज बनाते है, लेकिन जैन धर्मं समाज को व्यक्ति में देखता है, हर वाद ने व्यक्ति को छोटा कर दिया, लेकिन हम देखते है जैन विचार ने मनुष्य को सबसे महान बना दिया, किसी भी हालत में वह व्यक्ति की गुण और उसके सामर्थ्य को समाप्त नहीं होने देता, दुनिया के अन्य धर्म मनुष्य को सामाजिक प्राणी बनाकर उसे जीवन यापन करने केलिए लाचार बना देते है, लेकिन यहाँ तो मनुष्य को अपनी स्वतंत्रता सर्वोपरि है, वास्तव में तो यही स्थिति उसे 'अहं ब्रह्मास्मि' की ऊचाईयो तक पहुचाती है, आदमी से समाज बने तो क्या बड़ी बात है, इंसान को वह भगवान् ही नहीं, बल्कि इस समस्त दुनिया का रचयिता बनाने की बात करता है, इंसान का बनाया कंप्यूटर अपग्रेड हो सकता है तो फिर इंसान क्यों नहीं ? चाँद-सितारों को छुने वाला इंसान जब भगवान् बन जायेगा तो फिर क्या उस समय अपनी सीमा में उसे बाँध सकेगा ? वह 21वी शताब्दी की नहीं बल्कि इस अजर और अमर दुनिया का प्रणेता बन जायेगा !

आज हिंसा के प्रतिक है - ओसामा, ओबामा और अमेरिका ! इन तीनो '' को पराजित करने वाला है जैन दर्शन अपनी झोली में एक संजीवनी को संजोये हुए है जिसका नाम है अहिंसा, अनेकान्तवाद और अपरिग्रह ! तीनो एक-दुसरे से जुड़े हुए हिया, ये अलग नहीं हो सकते, चन्द्रगुप्त, अशोक और हर्षवर्धन उस खून-खराबे को नहीं देख सके इसलिए तो फिर उन्होंने कसम खाई की वे अब युद्ध नहीं करेंगे ! रावण से युद्ध करने वाले राम ने कहा, अयुद्ध चाहिए और अयोध्या को बसा लिया ! एक क्षत्रिय कहता है अब वध नहीं होगा तभी तो उसका सामाज्य अवध के नाम से प्रसिद्ध हो गया, हर लड़ाई के बाद इंसान शांति की तलाश में चलने को मजबूर हो गया ! पहला विश्व युद्ध समाप्त हुआ तो ईसा के मानने वालो ने लीग लोग नेशन बनायीं ! लेकिन फिर भी द्वितीय विश्वयुद्ध की महाज्वाला भड़की को राष्ट्रसंघ बन गया ! हर युद्ध के बाद अयुद्ध और हर हिंसा के बाद अहिंसा, यह इंसान की खोज रही है ! एटम बम डालने वाले जनरल इश्वर को पता लगा कि हिरोशिमा और नागासाकी में क्या किया, तब उसे भारत कि याद आई और अपनी माँ से कहने लगा - मुझे कोई श्वेत वस्त्रधारी महाराज के पास ले चल, मुझे वहा शांति मिलेगी क्योंकि उसने पढ़ा था कि भारत को जेट सकने वाला सिकंदर जब लोट रहा था तो उसे एक जैन साधू ने कहा था: "दुनिया को जीतने वाले काश !! तुम अपने आपको जीत सकते !" जैन साधू को सिकंदर अपने साथ ले गया ! जैन साधू सिकंदर के बाद में एंथैस में वर्सो तक लोगो को अहिंसा का सन्देश देता रहा ! एंथैस से सब कुछ बदल गया, लेकिन आज भी वहा जैन साधू कि प्रतिमा लगी हुई है, प्लेटो और एरिस्टोटल का एंथैस इतना प्रभावित हुआ कि "पैथागोरस जैसा गणितज्ञ कहने वाला कि मैं जैन हो गया हूँ !"

वी शताब्दी पानी के संकट कि शताब्दी है ! जैन मुनि तो कम पानी पीकर अपना काम चला लेते है, लेकिन हम जैन लोग क्या करेंगे ? उसका मूल मन्त्र है शाकाहार जो शांति, क्रांति हार्द और रक्षा को परिभाषित करता है ! मांसाहार के लिए हाईब्रिड बकरे, डुक्कर और मुर्गिया पैदा कि जा रही है ! इन कृत्रिम पधुओ पर अध्ययन करे तो एक बकरी का बचा यदि एक केलो है तो उसे दो किलो बनाने में 5,000 गैलन पानी लगता, लेकिन एक किलो टमाटर को पैदा करने केलिए चाहिए सिर्फ 160 लीटर पानी ! भारी जल संकट के समय आप क्या करेंगे ?

भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी अब हमारे भाग्य बन गए है ! जानवरों के क़त्ल के कारन यह विपदाए आती है ! यदि विश्वास आये तो 'बिसालॉजी' का अध्ययन जरुर कीजिये, जिसका अर्थ वह ज्ञान-शाखा है, जो breakdown of integrate system - समन्वित व्यवस्थाओ के विभाग अर्थात टूटने के कारन कि खोज करती है ! बीस सिद्धांत पहले डॉक्टर बजाज, इब्राहिम और सिंह के प्रथम रोमन अक्षरों से बना एक संक्षिप्त शब्द था, किन्तु अब यह एक नयी विज्ञान शाखा के रूप में विकसित हो गया है, एक संकट से उबारने वाला धर्मं ही केवल 21वी शताब्दी का धर्मं बन सकता है !